सोशल होने के लिए “सोशल-मीडिया” का मोहताज़ क्यों होना? सोशल होने के लिए “सोशल-मीडिया” का मोहताज़ क्यों होना?
लेखक : ह्यू लॉफ्टिंग स्वैर अनुवाद : आ. चारुमति रामदास लेखक : ह्यू लॉफ्टिंग स्वैर अनुवाद : आ. चारुमति रामदास
भगवान ने मोरों को कितना सुंदर रूप दिया है। यदि मैं भी ऐसा रूप पाता तो कितना मजा आता। भगवान ने मोरों को कितना सुंदर रूप दिया है। यदि मैं भी ऐसा रूप पाता तो कितना मजा ...
अर्थात राम नाम का जाप करने से ही वो दस गुना बढ़ जाता हैं..। अर्थात राम नाम का जाप करने से ही वो दस गुना बढ़ जाता हैं..।
थोड़ी देर में मैं ही जाकर देखता हूं कि क्या बात हुई। वो मेरी शक्ल देखने लगे। थोड़ी देर में मैं ही जाकर देखता हूं कि क्या बात हुई। वो मेरी शक्ल देखने लगे।
लेकिन कभी-कभी यही बंदर मोर उस मगरमच्छ को उलाहना दे देते! लेकिन कभी-कभी यही बंदर मोर उस मगरमच्छ को उलाहना दे देते!